योग रत्न पाठ्यक्रम

प्रथम प्रश्न पत्र - योग परिचय एवं वेदान्त दर्शन

ईकाई 1 - योग परिचय, वेद परिचय एवं विभाजन, संक्षिप्त टिप्पणियाॅं, प्रस्थानत्रयी, योग शब्द का अर्थ, परिभाषा, योग के प्रकार, योग का महत्व या उपयोगिता, योग का इतिहास।

ईकाई 2 - वेदान्त दर्षन के मुख्य सिद्धांत, कर्म के प्रकार, उपनिषदों में ईषावास्योपनिषद् का अध्ययन, अन्य उपनिषदों मे योग से संबंधित विषयों का अध्ययन।

ईकाई 3 - गीता शब्द का अर्थ एवं विषेषतायें, श्रीमद्भगवद्गीता मे वर्णित ज्ञानयोग, कर्मयोग एवं भक्तियोग का अध्ययन, आत्मतत्व, स्थित प्रज्ञज्ञानी के लक्षण, ईष्वरप्रणिधान या शरणागति का फल।

ईकाई 4 - वषिष्ठ संहिता मे वर्णित विषयों का अध्ययन, योग से संबंधित अन्य ग्रन्थों का अध्ययन।

ईकाई 5 - योग षिक्षण - शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से योग का प्रभाव, योग षिक्षण पद्धति, योग षिक्षण के सिद्धांत, षिक्षण की प्रकृति एवं षिक्षण का स्तर, कक्षा प्रबंधन, कक्षा प्रबंधन के चरण, सामान्य एवं चिकित्सात्मक कक्षाओं में अंतर।

संदर्भ ग्रन्थ:-

1. अष्टांग योग - स्वामी देवव्रत सरस्वती

2. विषिष्ट संहिता - दिगंबरजी, केवल्यधाम श्री मनसाधव योग मंदिर समिति, लोनावला - पुणे।

3.क्या कहते है उपनिषद् - प्रकाषक - डायमंड पाॅकेट बुक्स लेखक महेष शर्मा

4.श्रीमदभगवद्गीता - गीताप्रेस गोरखपुर - 17 नं0, 6 नं., 464 नं.

5.ईषादि नौ उपनिषद् - गीतापे्रस गोरखपुर - 66 नं.

6.वेदान्त दर्षन - गीतापे्रस गोरखपुर - 65 नं.

7.आसन, प्राणायाम मुद्रा बंध - स्वामी सत्यानंद सरस्वती

8.उपनिषदों मे क्या है? - पंकज दीक्षित - प्रकाषक - पुस्तक महल, दिल्ली

9.योगषास्त्र का संक्षिप्त परिचय - डाॅ.आर.सी.वर्मा (एमबीबीएस, एफआरसीएस , इंग्लैंड), योगाचार्य

द्वितीय प्रश्न पत्र - हठ योग एवं घेरण्य संहिता

ईकाई 1 - हठयोग का परिचय, षटकर्म - नेति, धोती, नौली बस्ति, त्राटक, कपाॅलभाॅति। हठयोग अभ्यास हेतु उपयुक्त स्थान का वर्णन, अभ्यास के 6 सहायक सहायक एवं 6 बाधक अंग।

ईकाई 2 - हठयोग के 15 आसनो का वर्णन, प्राणायाम का परिचय एवं हठयोग के माध्यम से प्राणायाम के 8 प्रकार का विस्तार से वर्णन।

ईकाई 3 - कुण्डलनी शक्ति पर मुद्राओं का प्रभाव एवं परिचय - 10 मुद्राओं का विस्तार से वर्णन एवं अभ्यास, नादानुसंधान की विस्तार से चर्चा।

ईकाई 4 - ध्यान एवं ध्यान के प्रकार, समाधि की अवस्था का उल्लेख।

ईकाई 5 - घेरण्ड संहिता का संक्षिप्त परिचय।

संदर्भ ग्रन्थ:-

1. हठ प्रदीपिका - स्वामी दिगम्बरजी, लोनावला, पुणे

2. घेरण्ड संहिता - स्वामी दिगम्बरजी, लोनावला, पुणे, स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती

तृतीय प्रश्न पत्र - योग से रोग निवारण

ईकाई 1 -

रोग का परिचय, विवेचना एवं विष्लेषण-निवारण, कुछ प्रमुख रोग, भारतीय परिप्रेक्ष्य में व्यक्तित्व-पंचकोष, पंचतत्व, पंचप्राण, पंचसूत्र एवं सप्तचक्र, व्यक्तित्व परिचय - व्यक्तित्व विकास मे योग की भूमिका।

ईकाई -2

प्रार्थना - प्रार्थना के प्रकार - प्रार्थना का दैनिक जीवन में महत्व, प्राकृतिक चिकित्सा के मूलभूत सिद्धांत।

ईकाई- 3

योग तथा मानसिक स्वास्थय - मनोविज्ञान तथा योग का तुलनात्कम अध्ययन। त्रासदी परिचय, व्यवस्थापन/तनाव उच्चाटन, तनाव परिहार, द्वन्द, निराषा, अवसाद- यौगिक उपचार।

ईकाई -4

ध्यान- मन पर प्रभाव। योग की गलत धारणायें एवं उनके श्रोत। गलत धारणाओं का मन पर प्रभाव एवं निराकरण के उपाय।

ईकाई -5

विभिन्न प्रकार के भोजन-आहार - (सात्विक, राजसिक व तामसिक) का मनोवृत्ति पर प्रभाव। उपवास के प्रकार, महत्व एवं शारीरिक प्रक्रियाओं पर प्रभाव।

संदर्भ ग्रन्थ:-

1. योग एवं मानसिक स्वास्थय - केवल्यधाम आश्रम, लोनावला, पुणे

2. रोग और योग - स्वामी सत्यानंद सरस्वती, योग पब्लिकेषन ट्रस्ट, मुंगेर, बिहार

3. प्राकृतिक आयुर्विज्ञान - डाॅ. राकेष जिन्दल, आरोग्य सेवा प्रकाषन, उमेष पार्क मोदी नगर (उ.प्र.)

4. आस्टियोपैथी चिकित्सा - डाॅ. गोवर्धनलाल पाराषर, 532, संजय कालोनी, प्रताप नगर, जोधपुर

5. समस्या पेट की समाधान योग का - स्वामी सत्यानंद सरस्वती, बिहार योग विद्यालय, मुंगेर, बिहार

6. प्राण विद्या - स्वामी सत्यानंद सरस्वती, बिहार योग विद्यालय, मुंगेर, बिहार

चतुर्थ प्रश्न पत्र - शरीर रचना एवं क्रिया विज्ञान

ईकाई 1 - मानव शरीर का सामान्य परिचय। विभिन्न अवयव एवं तंत्र जैसे परिवहन तंत्र, तंत्रिका तंत्र, अन्तस्त्रावी ग्रन्थियाॅं, पाचन तंत्र श्वसन, उत्सर्जन एवं प्रजनन तंत्र। संरचना, कार्यप्रणाली, क्रिया विज्ञान एवं आसनों का प्रभाव।

ईकाई 2 - आसनों का शरीर क्रिया विज्ञान संबंधी अध्ययन।

ईकाई 3 - क्रियाओं का शरीर के विभिन्न संस्थानों पर प्रभाव। मधुमेह रोग एवं यौगिक उपचार। प्राणायाम का विस्तृत वैज्ञानिक विवेचन एवं उसका शरीर एवं मस्तिष्क पर प्रभाव।

ईकाई 4 - बंध एवं मुद्राओं का शारीरिक एवं शरीर क्रिया वैद्यानिक पक्ष।

ईकाई 5 - शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन का शरीर पर प्रभाव।

संदर्भ ग्रन्थ:-

1. यौगिक चिकित्सा - स्वामी कुवल्यानंद

2. योगासन - स्वामी कुलल्यानंद

3. हम और हमारा स्वास्थय - डाॅ. वी.एम. भावे, डाॅ. एन.एस. देवधर, डाॅ. एस.वी. भावे

4. ऐनाॅटामी एण्ड फिजियोलाॅजी - रोस एण्ड विलसन

5. योगषास्त्र का संक्षिप्त परिचय - डाॅ.आर.सी.वर्मा (एमबीबीएस, एफआरसीएस, इंग्लैंड) योगाचार्य

पंचम प्रश्न पत्र - पातंजल योग सूत्र

ईकाई 1 - योग के लक्षण और उसकी आवष्यकता। चित्त वृत्तियाॅं, (समाधि पाद) अभ्यास, वैराग्य। समाधि का विषय, ईष्वर प्राणिधान, चित्त के विक्षेप और उनका निदान। समाधि के फल सहित अवान्तर भेंदों का वर्णन।

ईकाई 2 - क्रिया योग, अविद्या आदि पंच क्लेष, क्लेष नाष के उपाय। (साधन पाद) दृष्य और दृष्टा के स्वरूप की सार्थकता। प्रकृति-पुरूष के अविद्याकृत संयोग का स्वरूप। विवेक ज्ञान की प्राप्ति के लिये अष्टांग योग की आवष्यकता।

ईकाई 3- धारणा, ध्यान व समाधि के स्वरूप का प्रतिपादन। निर्बीज (विभूति पाद) समाधि के बहिरंग साधन रूप संयम का निरूपण, चित्त के परिणामों का विषय। प्रकृति जनित समस्त पदार्थों के परिणाम का निरूपण एवं फल सहित संयमों का वर्णन। विवेक ज्ञान एवं कैवल्य का निरूपण।

ईकाई 4 - सिद्धियों की प्राप्ति के पाॅच हेतुओ का तथा जात्यन्तर (कैवल्य पाद) परिणाम का विषय। ध्यान जनित परिणाम की संस्कार शुन्यता का प्रतिपादन, योगी के कर्मो की महिमा। कर्मफल प्राप्ति के प्रकार का वर्णन। धर्ममेद्य समाधि व कैवल्य अवस्था का निरूपण।

ईकाई 5 - सांख्य तथा पातंजल योग में भेद। पातंजल योग का महत्व।


संदर्भ ग्रन्थ:-

1. पातंजल योगप्रदीप - स्वामी ओमानंद तीर्थ, गीताप्रेस, गोरखपुर

2. पातंजल योगसूत्र - डाॅ. पी.सी. करमवेलकर, कैवल्यधाम, लोनावाला पुणे।

3. पातंजल योग दर्षन - आचार्य उदयवीर शास्त्र

4. पातंजल योग - डाॅ. विमला कर्नाटक

5. पतंजलि योग सूत्र मनन - डाॅ. आर.सी. वर्मा

प्रायोगिक योगाभ्यास

अद्वासन, आकर्ण धनुरासन, अर्द्धचक्रासन, अर्द्धकटिचक्रासन, अर्द्धमत्स्येन्द्रासन, अष्टवक्रासन, बद्धपदमासन, बकासन, भद्रासन, भूनमनासन, भुजंगासन, चक्रासन, घनुराकर्षणासन, घनुरासन, दोलासन, द्विहस्त भुजंगासन, द्विकोणासन, एकहस्त, भुजंगासन, गर्भासन, गरूडासन, गोमुखासन, ग्रीवासन, गुप्तासन, हलासन, हस्तपाद अंगुष्टासन, जानु शिरासन, ज्येष्टिकासन, कन्धरासन, कटिचक्रासन, कुक्कुटासन, कूर्मासन, लोलासन, मकरासन, मण्डुकासन, मार्जारिआसन, मत्स्यक्रीडासन, मत्स्यासन, मत्स्येन्द्रासन, मयूरासन, मुक्तासन, नौकासन, नटराजासन, पादहस्तासन, पाद अॅगुष्टासन, पाद शिरासन, पदमासन, पर्वतासन, पाश्र्चमोत्तानासन, पवनमुक्तासन, शलभासन, सन्तुलन आसन, संकटासन, सर्वांगासन, सिंहासन, शीर्षासन, सुखासन, सुप्त उद्राकर्षषासन, सुप्त वज्रासन, स्वास्तिकासन, सूर्य नमस्कार, ताडासन, तिर्यक भुजंगासन, तिर्यक ताडासन, तितली आसन, तोलांगुलासन, त्रिकोणासन, उदराकर्षणासन, उष्ट्रासन, उत्कटासन, उत्तान कूर्मासन, उत्तान मंडुकासन, वज्रासन, वक्रासन, वातायनासन, वीरासन, विपरीतकरणी मुद्रा, वृक्षासन, वृषासन, योगमुद्रा, योगनिद्रासन।